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| कुलदीप - भारत के प्रति दृष्टिकोण |
मेरे विचार में भारत प्रगति के पथ पर अग्रसर है,तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत एवं महत्वपूर्ण पहचान बनाने के लिए पूर्ण दृढ़ता एवं विश्वास के साथ कदम बढ़ा रहा है।मेरी नज़रों में भारत ,एक राजनैतिक रूप से परिपक्व ,आर्थिक रूप से स्थिर तथा सामजिक रूप से विकसित राष्ट्र के रूप में,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है।
भारत को वैश्विक समुदाय में अपेक्षित स्थान दिलाने के लिए,एक युवा तथा समर्पित नेतृत्व की आवश्यकता है, जो देश के आम आदमी के हितों को ध्यान में रखते हुए, वैश्विक परिप्रेक्ष्य में दीर्घकालिक नीतियां बनाकर उनका समुचित निष्पादन सुनिश्चित कर सके।
एक व्यक्ति को सामाजिक रूप से जागरूक और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है।'शिक्षा उपकर', 'प्रारंभिक शिक्षा कोष' की स्थापना तथा प्राथमिक शिक्षा का बजट बढ़ाना जैसे अन्य कई उपायों के बाद ही प्रारंभिक शिक्षा तक गरीबों की पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है और यह प्रयास हमारे सामाजिक ढांचे को मजबूत बनाने में शक्तिशाली उपकरण का काम करेगा।
मेरे विचार में महिलाओं का सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण अति-आवश्यक है, क्योंकि वे सामाजिक परिपक्वता और सशक्तिकरण का अभिन्न अंग हैं। घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन करके समान अधिकार प्रदान करने, जेंडर बजट जैसे कानून इस दिशा में उठाये गए सकारात्मक कदम हैं।
भारत के लिए एक वैश्विक पहचान हासिल करने के लिए, हम गरीबों की अनदेखी नहीं कर सकते हैं जो आज भी हमारे देश में बहुमत में हैं । हमें गरीबी के इस चक्र को शिक्षा और रोजगार के माध्यम से तोड़ने के लिए ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है.क्योंकि यही वो दो हथियार हैं जो इस चक्र को तोड़ सकते हैं।
हमारे राजनीतिक नेतृत्व से यह अपेक्षित है की वे , ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में,काम देश के लाखों आम लोगों की भावनाओ और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए करें। 'भारत निर्माण' और 'राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम' ग्रामीण भारत को उनके काम करने के मौलिक अधिकारों को प्रदान करता है। मेरे विचार में यह एक स्वागत योग्य कदम है।
मेरे विचार में भारत के विकास का भविष्य कृषि और औद्योगिकीकरण के बीच एक सामंजस्य में निहित है, टकराव में नहीं। जिस दिन हम इनके बीच संतुलन कायम करने में सम्पूर्ण रूप से कामयाब हो जायेंगे उस दिन विश्व में भारत के अग्रणी स्थान को कोई चुनौती नहीं दे सकेगा।
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