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| आपके अधिकारों के लिए संघर्षरत |

“मैं, हर भारतीय की आवाज सत्ता के प्रतिष्ठान में बैठे लोगों द्वारा सुनी जाए, इसके लिए सदैव प्रयासरत रहूँगा" - कुलदीप बिश्नोई विकास शील देशों में अग्रणी तथा विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में आज भारत, अपना खोया हुआ गौरव फिर से पाने की कगार पर खड़ा है। इसलिए आज हमारा यह कर्त्तव्य है की हमारे जीवन काल में ही हम भारत को विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में पहुंचा सके। मेरा प्रयास है की मै युवा शक्ति को इस दिशा में प्रेरित कर सकूँ क्योंकि ये युवा ही देश का भविष्य हैं।मुझे लगता है की अभी इस दिशा में बहुत कुछ किया जाना बाकी है। हमारे देश में योजना बनाने वालों की कमी नहीं है, बल्कि कमी है तो उस इच्छा शक्ति जिससे इन योजनाओं का ईमानदारी से निष्पादन हो सके। हमें प्रारंभ से ही अपने युवाओं में इस कर्तव्यबोध का संचार करना होगा और ये कार्य केवल हमारी माताएं ही कर सकती हैं क्योंकि व्यक्ति के व्यक्तित्व के निर्माण का मूल इन्ही की दी हुई शिक्षा है,इसलिए महिलाओं का सशक्तिकरण आवश्यक ही नहीं अपितु अपरिहार्य है। |
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| कृषि और औद्योगिकीकरण के बीच संतुलन का महत्व |

“मैं औद्योगीकरण का पक्षधर हूँ लेकिन अपने किसान भाइयों के हितों की कीमत पर नहीं”- कुलदीप बिश्नोई
कुलदीप जी हमेशा से औद्योगीकरण के पक्षधर रहे हैं तथा उनका हमेशा ये प्रयास रहा है की औद्योगीकरण तथा कृषि के बीच के फासले को कम किया जा सके।इसी क्रम में उनका एक महत्वपूर्ण सुझाव यह है की हमें औद्योगीकरण के लिए उस ज़मीन का उपयोग करना चाहिए जो कृषि के लिए अनुपयुक्त हो।इससे दोनों के हित सुरक्षित रहेंगे तथा टकराव की स्थिति नहीं आएगी।हमें समझना होगा की भारत की अर्थव्यवस्था कृषिप्रधान है और इसके हितों की कीमत पर देश का विकास संभव नहीं । इसीलिए कुलदीप जी ने यह मांग रक्खी थी की जिन किसानो की ज़मीन का जबरन अधिग्रहण किया गया है ,उन्हें उस एस.ई.जेड. प्रोजेक्ट में सहभागिता प्रदान की जाये और उनके हित सुरक्षित रह सके। ऐसा नहीं है की औद्योगीकरण नहीं होना चाहिए किन्तु हमें दोनों के विकास में आपसी सामंजस्य का महत्व समझना होगा, दोनों ही आवश्यक हैं तथा दोनों का समुचित विकास कुलदीप जी का लक्ष्य है । |
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| असीमित युवा शक्ति का उपयोग |

"युवा राष्ट्र, युवा लोग, चलो साथ मिलकर अपने सपनों के भारत का निर्माण करें " - कुलदीप बिश्नोई
कुलदीप युवा शक्ति के महत्व को समझते हैं तथा इसे सही दिशा प्रदान करने के लिए उन्होंने उनके के घरों तक जाकर,उन्हें देश तथा समाज के प्रति उनके कर्तव्यों का बोध कराने तथा उन्हें समाज के प्रति जागरूक बनाने का अभियान शुरू किया है।युवा शक्ति यदि सही दिशा को नहीं पा सकी तो इसकी प्रतिक्रिया के गंभीर परिणाम होंगे।कुलदीप जी का मानना है की इसके साथ ही यह इस राष्ट्र का भी कर्त्तव्य है की वो अपने युवाओं को शिक्षित करे और उन्हें रोजगार दे ,और कुलदीप जी इसी सोंच के साथ राजनीती के संग्राम में उतरे हैं । |
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| महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में काम |

"आरक्षण का कोई भी स्वरूप महिलाओं के लिए फायदेमंद नहीं है यदि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं हैं" - कुलदीप बिश्नोई
कुलदीप जी के विचार में महिलाओं का सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण अति-आवश्यक है, क्योंकि वे सामाजिक परिपक्वता और सशक्तिकरण का अभिन्न अंग हैं। आज हर तरफ महिला आरक्षण की चर्चा है,कोई इसके पक्ष में है तो कोई इसके विपक्ष में.कुलदीप जी महिला आरक्षण विधेयक का पूर्ण समर्थन करते हैं किन्तु साथ में उनका यह भी मानना है की हमें ज़मीनी हकीकत को नहीं भूलना चाहिए । जब तक महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो जाती आरक्षण की बात बेईमानी है । हमें इस दिशा में प्रयास करना होगा क्योंकि भारत की सुदृढ़ सामाजिक संरचना के मूल में महिलाओं का त्याग और कदम कदम पर उनका बलिदान है। भारत की प्रत्येक महिला को सुरक्षा तथा उसका हक़ दिलाना कुलदीप जी की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है । |
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